दिनेश के साथ इस्माईलाबाद में Ismailbad Yatra with Dinesh
वैसे तो हम गांव के प्रत्येक व्यक्ति के साथ जुड़े हैं और कभी ना कभी कहीं ना कहीं मुलाकात होती रहती है, बातचीत होती रहती है परंतु एक लंबे समय बाद दिनेश एनिमल अटेंडेंट से बातचीत हुई तो बड़ा अच्छा लगा। इतनी कम उम्र में और काफी कुछ ज्ञान उसने हासिल कर लिया है हमें लगा कि इतना ज्ञान तो हम भी प्राप्त नहीं कर पाए क्योंकि वह साहित्य पढ़ता है, किताबें पढ़ता है और लगातार पढ़ाई से जुड़ा रहा है। वह नौकरी या कमाई के लिए नहीं बल्कि ज्ञानार्जन के लिए साहित्य पढ़ता है। उसने मुझसे मिलने को कहा और मेरी भी इच्छा थी कि कई बार हम फोन पर बातचीत कर चुके थे और मिलने की बात, परंतु मिल नहीं पाए। हमने मिलने का प्लान बनाया और मुझे किसी कार्यवश उस तरफ जाना था तो मुझे लगा कि वहीं पर रात्रि ठहराव किया जाए। मैं देर शाम को ही वहां पर पहुंचा और वह मुझे लेने के लिए आया। उसके कमरे में किताब में देखकर मुझे बड़ी खुशी हुई कि आज के वक्त में भी किताबों से जुड़ा हुआ है और अध्ययन लगातार जारी है। स्वाध्याय में वह बचपन से ही लगा था तो उसने बताया कि यह किताबों की लाइन आधी अलमारी तक ही गई है, मुझे लगता है यह लाइन और अधिक ऊंची हो जान...