रक्तदान रामू कवि किसान नचार खेड़ा जींद हरियाणा Blood Donation 22 Ramu Kavi Kisan Nachar Kheda
रामू कवि किसान नचार खेड़ा जींद हरियाणा इंडिया द्वारा रक्तदान
1. दुर्जनपुर सरकारी स्कूल 2010
2. बस स्टैंड, रोहतक 2012
3. गोहाटी, आसाम 2016
4. अनंत राम ब्लड बैंक, बरवाला (हिसार) 2023
5. अमृतसर, पंजाब 27 अप्रैल 2025
6. DHBVN, हिसार 31 दिसंबर 2025
Blood Donation 22 Ramu Kavi Kisan Nachar Kheda31 दिसंबर 2025 दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम सिटी हिसार, व सेक्टर 1-4 डिवीजन द्वारा रक्तदान सिविल लगाया गया जिसमें रक्तदान किया,
27.04.2025 अमृतसर
गोलू मोनू और पुणे के साथ अमृतसर घूमने गए थे, तो स्वर्ण मंदिर और जलियांवाला बाग से आगे आते हुआ महाराजा रणजीत सिंह चौक पर एक आदमी तख्ती उठाई रक्तदान महादान हाथ में लेकर घूम रहा था मुझे लगा कि आसपास में जरूर रक्तदान कैंप लगा है तो मैंने देखा कि रेलवे स्टेशन से आते हुए जो महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति वाला चौक है जहां पर से फ्री में जलियांवाला बाग से रेलवे स्टेशन के लिए जो बसे आते हैं उसके पास ही रक्तदान कैंप लगा था हमारे गाड़ी में जाने का टाइम बचा था और मेरी इच्छा हुआ कि रक्तदान करके आते हैं। To maine जब मैं ब्लड डोनेशन कर रहा था सी और थैली लगी हुई थी तो उसी टाइम वहां पर एक आदमी था जिसको घबराहट हो गई थी। श्रीमती पार्वती देवी हॉस्पिटल यूनिट 2 अमृतसर द्वरा दोबारा एक प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया गया।
Certificate of Appreciation by Smt Paarvati Devi Hospital Unit 2
एक बार की बात मुझे ध्यान में है कि वर्ष 2016 में जब हम नॉर्थ ईस्ट उत्तर पूर्व भारत के टूर पर गए थे तो उस वक्त मैंने रास्ते में कोई ब्लड बैंक देखा तो कई दिन हो गए थे मेरी इच्छा हुई कि मैं खून दान करके आता हूं। हालांकि refreshment के तौर पर उन्होंने मुझे जूस देना चाहा तो मैंने मना कर दिया क्योंकि मैं पैक जूस बहुत कम पीता हूं और ताजा दूसरी पीना पसंद करता हूं। उन्होंने साथ में यह भी पूछा था कि आप किसके लिए खून देने आए हैं तो मैंने बताया कि मैं अपनी मर्जी से बिना किसी के लिए ही खून देने आया हूं किसी भी गरीब और जरूरतमंद को आप चढ़ा देना तो फिर उन्होंने से पैसे मेरे लिए रसगुल्ले मंगवा लिए।
जब मैं हैवी ड्राइविंग लाइसेंस की ट्रेनिंग की थी वर्ष 2012 में तो जो भी हमारे ड्राइवर थे वह उस्ताद बहुत ही एक्स्पर्ट थे और एक नेक दिल इंसान भी। उस वक्त रोहतक बस स्टैंड पर रक्तदान शिवर लगा था जिसमें मैंने भी रक्तदान किया था।
अब तो साल भी मुझे पक्का ध्यान में नहीं है जब मैंने पहली बार रक्तदान किया था। सर्दियों की बात है, मैं और नुवासा बाड़ी काट कर छड़ी उठा रहे थे। गेहूं की बिजाई का समय कम बचा था यानि कि समय का अभाव इसलिए हम बीच में समय निकालकर गांव दुर्जनपुर के युवा संगठन द्वारा लगाए गए कैंप में रक्तदान करने गए और वहां से साथ के साथ लौटकर हमने दोबारा से फिर काम शुरू कर दिया। हमने वहां पर देखा के कई हृष्ट पुष्ट और मोटे तगड़े लोगों को घबराहट हो गई थी और उनका चक्कर आ गए थे, उनके पैर ऊपर को उठा रखे थे। परंतु हमें पता नहीं पता था के रक्तदान के बाद आराम भी जरूरी होता है। हम वापस काम पर लौट आए और लग गए। हमें कभी महसूस ही नहीं हुआ। हमने घर पर भी कई दिनों बाद बताया तो घर वालों ने बताया कि शरीर में कमजोरी आ जाती है और हमें बता देते तो आपको और अधिक स्वास्थ्यवर्धक खाना देते ताकि कोई दिक्कत ना आए, मगर हमें कोई भी दिक्कत आई ही नहीं थी क्योंकि वैसे ही हम ऑर्गेनिक खाना खा रहे थे।





टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें