अलेवा में पोस्टिंग और पंचायत विभाग में जॉइनिंग Posting for aleva panchayati Raj joining

झुक गया सो पा गया 

अड़ गया सो गवा गया

दोपहर के बाद चाय के टाइम मैं चाय का इंतजार कर रहा था तभी हमारे व्हाट्सएप ग्रुप पर मुझे एक्शन ऑफिस चीन की तरफ से पोस्टिंग के बारे में s.m.s. प्राप्त हुआ हमारे हम सबकी ड्यूटी लगा दी गई थी और हमें स्टेशन अलॉट कर दिए गए थे मेरा स्टेशन उचाना आने की उम्मीद थी परंतु सिफारिशों के चलते मेरा स्टेशन लेवा दे दिया गया उचाना मेरे घर से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर था जबकि मुझे अलेवा का स्टेशन दे दिया गया जो कि मेरे घर से 49 किलोमीटर दूर था।



मैंने कल जब मैं एक्शन ऑफिस में जींद गया था ट्रेनिंग के लिए और साथ में हमारे पोस्टिंग स्टेशन दिए जाने थे तो उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि कहीं पोस्टिंग सिफारिशों के आधार पर न कर दें और ऐसा ही हुआ परंतु फिर भी मुझे उम्मीद थी कि शायद मेरी पोस्टिंग उचाना में हो जाएगी परंतु जब मेरी पोस्टिंग पंचायत विभाग अलेवा में हो गई तो फिर मैंने उन लोगों से संपर्क साधा जो भी बोलते रहते थे कि हमारी इतनी सिफारिश है और इतनी पहुंच है तो मैंने उनको बोला कि आप मेरी पोस्टिंग अलेवा से उचाना करवा दीजिए तब तो मैं भी मान जाऊंगा कि वास्तव में आपकी पहुंच है परंतु मुझे उम्मीद कम ही नजर आ रही थी फिर भी मैंने कोशिश जारी रखी जैसा कि अक्सर में प्रत्येक काम में करता रहता हूं।

फिर जो मैंने इस सप्ताह में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्राइवेट बीए और m.a. के फॉर्म भरे थे उनको लेकर गांव दुर्जनपुर में जाना था तो मैं दाखाना में पहुंच गया और काका सुभाष से मिला कई देर वहां पर बैठा रहा और डाक विभाग की स्कीमों और उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के बारे में बात की तो पता चला कि सरकारी कार्य में बहुत सी खामियां रहती है और सरकार उनको उचित समय पर दुरुस्त नहीं करती हैं तो मैंने भी उनको इन्हीं बातों का हवाला दिया कि जैसे की फैमिली आईडी में भी बहुत सी कमियां हैं परंतु बहुत लंबे समय बीत जाने के बावजूद भी सरकार द्वारा ठीक नहीं की जा चुकी हैं और खुद मैंने उसी दिन मुख्यमंत्री महोदय को एक पत्र लिखकर और डाक विभाग का वहीं से लिफाफा लेकर उसके द्वारा रवाना कर दिया जो मैंने पिछले सप्ताह लिखा था परंतु पोस्ट नहीं कर पाया था।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जो भी डाक थी उनकी रजिस्ट्री स्पीड पोस्ट करने में काफी समय लग रहा था क्योंकि एक तो इंटरनेट की स्पीड स्लो थी और फिर वह मशीन भी छोटी थी इसलिए मैं अपने ताऊ धर्मवीर से मिलने पहुंचा और वहां पर बैठकर ताई और ताऊ से काफी लंबे समय तक हम पारिवारिक बातें करते रहे उसी दौरान संदीप भी ट्रैक्टर लेकर आ गया था तो हमने खेती के बारे के बारे में भी बातचीत की।

फिर मैं वापस आते हुए संदीप मिल्कमैन जिन्होंने डेरी के साथ-साथ अब परचून की दुकान भी कर ली थी उनसे मिला और मेरी जॉइनिंग के बारे में और चित्र प्लान के बारे में भी काफी देर तक बातचीत की उसके बिल्कुल सामने ही मेरा ग्यारहवीं क्लास का दोस्त फौजी था उसने भी परचून की दुकान पिछले काफी लंबे समय से कर रखी थी तो मैं उसके पास भी बैठकर बातचीत की तो उसने बताया कि वह दुकान के लिए लगभग 7 जगह बदल चुका है और आज भी उसकी दुकान अच्छे से चल रही है बस उसने उधार कम कर दी है जब भी हम मिलते हैं तो हमारे स्कूल टाइम के बारे में और उस वक्त के दोस्तों के बारे में अवश्य ही बात करते हैं तो वैसे ही सबसे खुशनुमा दिनों के बारे में बातचीत करके हम पर संचित हो गए।

वहां से चलकर आते हुए मैं काका धोला के घर गया परंतु काका और काकी कोई भी वहां पर नहीं थे परंतु सभी बच्चे वहां पर थे तो बातचीत के दौरान मुझे पता चला कि उनमें से दो तो बीमार हैं और दो जो 12वीं कक्षा में पढ़ती थी उन्होंने आगे पढ़ने के लिए हिसार जाने का मन बनाया था कंप्यूटर सीखने के लिए हालांकि मैंने सबसे पहले उनसे पूछा कि वह भविष्य में क्या करना चाहते हैं और उनका क्या प्लान है तभी मैं उन्हें इस बारे में मार्गदर्शन कर सकता हूं तो उन्होंने कंप्यूटर के बारे में ही बताया तो मैंने बोला कि कंप्यूटर तो मैं तुम्हें यहीं पर सिखा दूंगा हिसार जाने की जरूरत नहीं है इतने पैसे लगाने की जरूरत नहीं है वक्त गवाने की जरूरत नहीं है मैं अपनी वाइफ को भी बोलता हूं कि कंप्यूटर सीख लो परंतु है इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं देती नहीं वह कंप्यूटर सकती है और ना ही वह इंग्लिश भी करती है शादी के 8 माह बीत जाने के बावजूद भी उसने अभी अंग्रेजी के नहीं सीखे हैं क्योंकि उसकी रुचि नहीं है और


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