प्रेरणा जैविक खेती प्राकृतिक खेती के नुक्सान Problem in Natural Farming
मेरे अपने समय के हिसाब से खेत में जाकर काम करना, परिवार और दोस्तों के साथ कच्ची सब्जियां और सलाद खाना, फिर से काम में लग जाना, यही मेरे लिए स्वर्ग के समान है।
जोटा लगाते टाइम गंठा या गुड़ के साथ रोटी खाना, किसी भी फाइव स्टार या 7 स्टार होटल के खाने को फेल कर देता है, मगर इसका स्वाद वही जान सकता है जिसने मेहनत के बाद ईमानदारी से चखा हो मजबूरी में नहीं।
- रामू कवि किसान नचार खेड़ा
जैसे ही प्राकृतिक खेती जैविक खेती जहर मुक्त खेती की बात शुरू की तो इसके फायदे की बजाए नुक्सान कमी गिनाने शुरू हो गए। मेरी तो आधे से ज्यादा एनर्जी इस बात पर जोर लगाने में खर्च हो जाती के मैं सही कर रहा हूं घाटे का सौदा नहीं है गलत काम नहीं कर रहा हूं बट साथ देने के बजाय परिवार के अधिकतर सदस्य इस बात पर जोर लगा रहे थे के इसको कैसे रोका जाए। ओर उनके प्रयास लगातार जारी थे। अधिकत्तर बातें याद नहीं रहती तो मैने कुछेक दिन की बातें लिख ली नहीं तो 150 पेजों पर तो फिर नेगेटिव बातें ही आ जाएंगी और मुझे काम पर भी फोकस करना था प्राकृतिक खेती, उसका पंजीकरण, घर के लिए सब्जी, बच्चों का बेहतर भविष्य, उनकी शिक्षा स्वास्थ्य, वर्तमान के खर्चे, भूतकाल के भुगतान, ऑफिस के काम, सीएससी के काम, cet की तैयारी, साथ में कुछ अच्छा साहित्य और मेरे फोन जिसके बारे में बोला जाता है के एसटीडी खोल रखी है 24 घंटे चालू रहता है, कई बार तो मैं भी कन्फ्यूज्ड हो जाता हूं के यदि 24 घंटे फोन रहता है तो फिर मैं काम कब करता हूं ऑफिस कब जाता हूं।
सबसे बड़ी कमी मैं खुद था क्यूंकि मैं अत्यधिक आलसी हो चुका था काम बहुत कम करता था इसके लिए ये बहाना भी था के मैं ड्यूटी पर सिरसा जाता था सप्ताह में 2 दिन के लिए आता तो कई काम मेरा इंतजार करते और मुझे इधर उधर जाना पड़ जाता। साथ में बच्चों मेरा अत्याधिक लगाव ओर उनको टाइम देना। इसीलिए मैं लगातार लगन से लगा हुआ था के कुछ बेहतर करना है। क्यूंकि यदि मैं रोकने से रुक जाता तो शायद पुना लाइनमैन ना होती, मोदा महादेव का मालिक न होता, रिलायंस डेयरी फूड्स Ltd नचार खेड़ा ना होता, न होता महिला MPCS नचार खेड़ा जिसकी आमदनी से कई साल अपने घर के खर्चे अच्छे से चले, और जो दूध डेयरी आज भी चल रही है किसी का घर चला रही है। ओर हो सकता है मैं प्रयास ना करता तो शायद इस से भी बेहतर होता फिर मैं सोचता हूं क्या मैं बेहतरीन के लिए प्रयास ही न करूं मगर फिर मुझे लगता है के प्रयास ना करना भी कायरता और मौत की निशानी है और मैं शायद ना तो कायर हूं और मैं ज़िंदा हूं इसलिए मुझे अपना प्रयास जारी रखना चाहिए। मैं इन बादलों के पार देखता हूं एक उज्जवल भविष्य पूरी मानव जाति का।
प्राकृतिक जैविक तरीके से लहसुन लगाने की वीडियो
https://ramukavikissan.blogspot.com/2025/10/starting-of-natural-farming-organic.html
09 nov शाम 4 बजे मैं, मधु, बबीता बीज बोने गए चरणू को भी मैने बुला लिया था, खेत में गए तो मौसी ने कहा इतने में क्या करोगे जगह खराब कर दी रसीना भी वही थी, उसने भी जरूर भड़काया होगा, बाबू ने भी कहा के एक कोने में बो लेते सब्जी इसमें गेहूं बो देते हैं मैने कहा ये जगह भी कम है। फिर बाबू ने कहा के तुमने कहा थे के मैं पराली उठा लूंगा खेत से मौसी ने भी कहा के तुम्हारे बाबू सही कह रहे हैं उनकी सुनो में कहा इतनी उम्र हो गई उनको खेती का ढंग से पता नहीं चला के कैसे करनी है तुम सब 20 साल के हालात के हिसाब से निर्णय लेते हो, मैं 20 साल के अनुभव से आगे की सोच के काम करता हूं तो तुम्हारी कैसे सुनूं। ओर जो पराली उठाने की बात है तो जीतू ने उस सुन मुझे रोक दिया था के पहले पराली जला दो बाद में उठाते रहना, तो मैने कहा था के मुझे पराली उठानी है उसकी राख नहीं।
बाबू ने कहा के मैं हर बार अच्छी तरह से हर चीज़ बो देता था, पर हमें तो गाड़ी वाले से ही सारी चीज़ खरीदनी पड़ रही हैं कई साल से।
फिर बात ये थी कि इतनी गेहूं का नुक्सान हो गया मैने बोला के जितनी गेहूं इस सारे में होती उस से ज़्यादा का तो 4 डयोल पर लहसुन हो जाएगा ये घाटे का सौदा नहीं है। फिर बोला गया के इतने दिन हो गए धीरे धीरे बो रहे हो जमीन बहुत गीली थी बट बोले के ये सुख जाएगी बात आई हुई है, बूंडा डाल बना रखा है मैने बोला के sutra किसको दिखाना है हमारा खेत हम बोने वाले पैदा होनी चाहिए बस।
फिर charnu ने भी वीडियो कॉल करके निवासे को कमियां गिनवाई और घर वालों का पक्ष लिया। मैने उसे धीरे से कहा के मेरे घर पर 14 में से 10 लोग कमी निकालने वाले हैं तुम्हे कमी सुधारने के लिए बुलाया है कमियों का तो मुझे भी पता है इनको भी, मैने पूछा तुमने क्या बढ़िया किया है खेती में या प्राकृतिक खेती के लिए अब तक मेरे से बेहतर जो मेरे में कमी निकल रहे हो, तुमने तो शुरुआत तक नहीं की, मैने कुछ तो किया कुछ करेंगे तो कमी भी होगी, तुमने किया ही नहीं कुछ तो कमी किस्में निकलेगी, तब वो चुप हुआ। फ़िर वो बोला के तुम्हें खेत की तैयारी अच्छे से करनी चाहिए थी, कल क्या किया मने बोला सीएससी का काम किया और बीज लाने के लिए पैसे का इंतज़ाम किया, फिर बाकी दिन मैं बच्चों को भी संभालता हूं, फोन को भी, सीएससी को भी, रेस्ट भी जरूरी है ज़िन्दगी में, फिर जितने भी मेरे खिलाफ़ प्राकृतिक खेती नहीं करने की साजिशें चल रही हैं उनका सामना करना पड़ता है उसमें काफ़ी एनर्जी लग जाती है। रात तक चरणयू को समझ आ गया था के हालात के हिसाब से भी चलना पड़ता है सब कुछ अपने हाथ में नहीं है।
मैने मधु बबीता को घर भेज दिया के आज लेट हो गए कल बिजाई करेंगे फिर नंबर आया विक्रम का उसने कहा के तुम सुबह 5 बजे उठ सकते हो क्योंकि उसको ये पता नहीं के मैं 5 बार तो रात को भी उठता हु तो नींद पूरी कैसे होगी जोकि सबसे जरूरी हिस्सा है हर किसी की जिंदगी का नहीं तो हम बीमार पड़ सकते हैं जोकि मुझे मंज़ूर नहीं। फिर उसने कहा तुम अच्छे से खुदाई करके पानी डाल सकते थे नहीं डाला ओर भी कई कमियां गिनवाई जोकि हर कोई आसानी से ये काम कर सकता है कर चुके हैं तो मैने कहा के बिल्कुल सही कहा तुमने मैं कुछ नहीं करता कुछ नहीं कर सकता बट तुमने क्या किया मेरे लिए या मेरे साथ काम में प्राकृतिक खेती का तो मुझे कैसे बोल सकते हो के नहीं किया मैने कुछ तो किया तुमने तो कुछ भी नहीं किया। करना है तो काम करो साथ दो रोको तो मत, तब मैंने एक उदाहरण दिया जोकि उसी वक्त ध्यान में आया था, के पुराने घर को कभी तो टूटना है उससे पहले मैने एक नए तरीके से नए अनोखे डिजाइन का घर शुरू कर दिया जो सबके लिए सुरक्षित आरामदेह सुविधाजनक हो, उसकी दीवारें थोड़ी टेढ़ी हो गई क्योंकि मैं एक अच्छा मिस्त्री नहीं था शायद पहली बार में तो कोई भी नहीं होता मगर मेरे घर में से 14 में से 10 मेंबर ने बोला के तेरे बस की बात नहीं है ऐसा घर तो बन ही नहीं सकता इस दीवार को तोड़ तो नुकसान करोगे तुम, मतलब घर की दीवार सीधी करवाने की बजाए, उसकी कमी दूर करवाने की बजाए, सहारा लगाने की बजाए सब दीवार गिराने में जुटे हैं क्या फ़र्क पड़ता है?
साथ में sonit प्रिशा शरारत कर रहे थे, उनको भी रोकना था, बाबू की भी सुननी थी, मौसी की भी, काका बलवान भी आया था, फूफा होशियारा, kheri मसानिया से उस्ताद जी भी, मैं कसी लेने गया था तब तक मेरे पीछे से सबको मेरी कमियों से अवगत करवा दिया गया था के अबकी बार कितनी घाटा मैं करने वाला हूं।
09 Nov सुबह करोड़ा से देसी बीज लेने गया 60 km जाना 60 आना 120 km का सफ़र, बीज लेके आया देसी गाजर, मूली, शलगम, चुकंदर, पालक, धनिया, जीरा, मेथी ताकि सब्जी एवं रसोई का सारा सामान घर पर उपलब्ध हो वो भी जहर मुक्त घर पर kheri मसानिया se driver evm फूफा होशियार सिंह जंडली आ गए तो उनके पास टाइम लग गया फिर जैसे ही खेत गया वही हुआ जो हर रोज होता है प्राकृतिक खेती करने से रोकने के रोज़ नए तरीके नए बहाने
सुबह मधु ने बोला था के तुम्हारे बस की नहीं है खेती, जब मैं घर होता हूं बोलते हैं यही पड़े रहते हो कुछ नहीं करते, फिर कल परीक्षा व छोटी को खेत में ले गया दोपहर 12 बजे लौटा तो बोले इनको लिए बाहर घूम रहे हो ठंड में मारोगे फिक्र नहीं है तुम्हे, बच्चों को नहीं सम्भाल सकते, जबकि प्रिशा ने सुबह देश पिया पोटी की फिर एक सेब खाया खेत में जाके फिर एक लाल अनार खाया (वीडियो उपल्ब्ध है), एक मूली खाई, घर आके मेरे साथ एक रोटी खाई, लस्सी पी, उसके लिए शायद मेरे हिसाब से सर्वोत्तम खुराक थी मगर समझने को तैयार नहीं
सुबह ही मौसी ने जीतू को कहा के बिक्रम खेत में गेहूं के लिए कोने खोदेगा साथ में डयोल स्मारेगा तुम भी चले जाना, जीतू बोला क्या ज़रूरत है फालतू में अभी कुछ भी करने की कोने बाद में खोद देंगे और डयोल samarne की जरूरत ही नहीं है सारी सही तो हैं, मैने कहा शुक्र है मैं बच गया तुम्हारे बिक्रम के कहने से मैं खेत म जाता ओर जीतू इस काम से मना कर देता जैसा कि मेरे साथ होता आया है, 5 बार कोई काम गया हर बार विरोध घर से भेजा ये काम करो खेत में बोला के नहीं करना है, फिर नहीं करने में फ़ायदा लगा एनर्जी ओर टाइम दोनों बच जाते हैं और ज़्यादा सुन ना भी नहीं पड़ता इसी में पड़ता लगता है
08 संडे को प्रिशा को छोटे खेत में कछुआ दिखाने के गया जो कुएं में था फिर वापिस आया, इनके सर्टिफिकेट के बारे खुशीराम के पास गया, HDFC BANK वाले नानू के विक्रम ने भी चार महीने पहले जॉब छोड़ दी थी, घर पर प्रिशा को सेब खिलाया, दूसरे खेत में ले गया परीक्षा ने अनार, मूली खा लिए बोले बीमार होगी ये बाहर लिए घूम रहे हो, न ले जाएं बोलते हैं पड़े रहते हो घर, मौसी ने तो कहा के घर ही मत आया करो परीक्षा ज्यादा रोती है
5 Nov बाबू ने कहा कि जो बोना है बो दो दो महीने लगा दिए तब तक तो लहसुन फसल तैयार भी हो जाती
5 nov मौसी ओर बाबू शीशम की लकड़ी अलग कर रहे थे बहुत ज्यादा पते हो गए थे तो मैने मौसी को कहा के एक पली में गठरी बांध के ये पत्ते मैं खेत में ले जाऊंगा खाद बनेगा और खरपतवार भी पैदा नहीं होगे तो मौसी ने कहा के मैं तो इनको kurdi पर फेंक दूंगी वहां भी खाद बनेगा जो 2 साल लगेंगे जोकि मैं वई काम 2 महीने में करने वाला था।
4 Nov जब मैंने दो nov को लस्सी एवं गोबर का छिड़काव किया तो बोले कि बुरा हाल कर रखा है गोबर छिड़का है हर जगह
मैने कहा कि एकदम से कुछ नहीं होगा थोड़ा टाइम तो लगेगा सब कुछ आराम से हो जाएगा
01 Nov मौसी ने कहा के इतनी जगह जितनी तुमने घेर रखी है इसमें तो 2 साल की सब्ज़ी आ जाए पूरे परिवार के लिए, ऐसा दो बार ज़ोर देकर कहा तो मैने कुछ नहीं बोला मुझे लगा के ये तो मैने बड़ा घाटे का सौदा के दिया अंजाने में, फिर मैने बिक्रम ने पराली कूट ते हुए अनुमान लगाया के एक डबरा से भी आधा यानि एक कनाल में प्राकृतिक खेती का प्लान है हमारे खेत में अधिकतम 55 मण गेहूं हुई है यदि 60 मण प्रति एकड़ भी माने तो आधा किला के 30 मण ओर एक डबरा में 15, तो एक कनाल में 7.50 मण यानी के लगभग 3 क्विंटल गेहूं हुई जो 2500 के हिसाब से 7500 रुपए की हुई, तब मुझे एहसान हुआ के ये तो 2 महीने की सब्जी भी मुश्किल से आएगी।
हर जगह पर अड़ंगा ही फैला रखा है 26 oct
पराली को कूट दिया तो बोला कि इसको क्यों फैला रहे हो 30 oct
जितनी जगह तुमने लहसुन और सब्जी के लिए घेर रखी है इतने में तो 2 साल की सब्ज़ी आ जाती पूरे परिवार के लिए 1 nov
जब हमने विश्लेषण किया पता चला कि हमारे खेत में 55 मन से ज्यादा गेहूं की पैदावार कभी नहीं हुई है यदि 60 मन के हसाब से भी जोड़े तो एक कनाल में 7500 की गेहूं होती है जीतने का एक महीने में फल सब्जी पूरा परिवार खा जाता है 14 मेंबर का
जब लस्सी और जीवामृत का स्प्रे sham ko ja raha tha to bola ki hamesha let Hi Kam karte ho 2 oct


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