प्रेरणा जैविक खेती प्राकृतिक खेती के नुक्सान Problem in Natural Farming

मेरे अपने समय के हिसाब से खेत में जाकर काम करना, परिवार और दोस्तों के साथ कच्ची सब्जियां और सलाद खाना, फिर से काम में लग जाना, यही मेरे लिए स्वर्ग के समान है।

जोटा लगाते टाइम गंठा या गुड़ के साथ रोटी खाना, किसी भी फाइव स्टार या 7 स्टार होटल के खाने को फेल कर देता है, मगर इसका स्वाद वही जान सकता है जिसने मेहनत के बाद ईमानदारी से चखा हो मजबूरी में नहीं।

रामू कवि किसान नचार खेड़ा


जैसे ही प्राकृतिक खेती जैविक खेती जहर मुक्त खेती की बात शुरू की तो इसके फायदे की बजाए नुक्सान कमी गिनाने शुरू हो गए। मेरी तो आधे से ज्यादा एनर्जी इस बात पर जोर लगाने में खर्च हो जाती के मैं सही कर रहा हूं घाटे का सौदा नहीं है गलत काम नहीं कर रहा हूं बट साथ देने के बजाय परिवार के अधिकतर सदस्य इस बात पर जोर लगा रहे थे के इसको कैसे रोका जाए। ओर उनके प्रयास लगातार जारी थे। अधिकत्तर बातें याद नहीं रहती तो मैने कुछेक दिन की बातें लिख ली नहीं तो 150 पेजों पर तो फिर नेगेटिव बातें ही आ जाएंगी और मुझे काम पर भी फोकस करना था प्राकृतिक खेती, उसका पंजीकरण, घर के लिए सब्जी, बच्चों का बेहतर भविष्य, उनकी शिक्षा स्वास्थ्य, वर्तमान के खर्चे, भूतकाल के भुगतान, ऑफिस के काम, सीएससी के काम, cet की तैयारी, साथ में कुछ अच्छा साहित्य और मेरे फोन जिसके बारे में बोला जाता है के एसटीडी खोल रखी है 24 घंटे चालू रहता है, कई बार तो मैं भी कन्फ्यूज्ड हो जाता हूं के यदि 24 घंटे फोन रहता है तो फिर मैं काम कब करता हूं ऑफिस कब जाता हूं।

सबसे बड़ी कमी मैं खुद था क्यूंकि मैं अत्यधिक आलसी हो चुका था काम बहुत कम करता था इसके लिए ये बहाना भी था के मैं ड्यूटी पर सिरसा जाता था सप्ताह में 2 दिन के लिए आता तो कई काम मेरा इंतजार करते और मुझे इधर उधर जाना पड़ जाता। साथ में बच्चों मेरा अत्याधिक लगाव ओर उनको टाइम देना। इसीलिए मैं लगातार लगन से लगा हुआ था के कुछ बेहतर करना है। क्यूंकि यदि मैं रोकने से रुक जाता तो शायद पुना लाइनमैन ना होती, मोदा महादेव का मालिक न होता, रिलायंस डेयरी फूड्स Ltd नचार खेड़ा ना होता, न होता महिला MPCS नचार खेड़ा जिसकी आमदनी से कई साल अपने घर के खर्चे अच्छे से चले, और जो दूध डेयरी आज भी चल रही है किसी का घर चला रही है। ओर हो सकता है मैं प्रयास ना करता तो शायद इस से भी बेहतर होता फिर मैं सोचता हूं क्या मैं बेहतरीन के लिए प्रयास ही न करूं मगर फिर मुझे लगता है के प्रयास ना करना भी कायरता और मौत की निशानी है और मैं शायद ना तो कायर हूं और मैं ज़िंदा हूं इसलिए मुझे अपना प्रयास जारी रखना चाहिए। मैं इन बादलों के पार देखता हूं एक उज्जवल भविष्य पूरी मानव जाति का।


मैं जमीन पर काम कर रहा था वह पैसे पर काम कर रहे ह जो बोलते हैं की खेती घाटे का सौदा है । क्योंकि मुझे पता है कि और इस बात के सबूत हैं कि पिछले कुछ सालों में हमारे घर का बजट सबसे अधिक बीमारियों पर खर्च हो जाता है जिनकी हम अस्पताल और दवाइयां कंपनियां को दे देते हैं। जिसमें सिर्फ मनुष्य नहीं बल्कि पशुओं और खेती की दवाइयां भी शामिल हैं। हम अपनी कमाई का 70% से भी अधिक हिस्सा दवाइयां पर खर्च कर देते हैं और भविष्य को देखते हुए मुझे लग रहा था कि पिछले कुछ सालों से हमारा मेडिकल खर्च  लगभग ₹100000 प्रति व्यक्ति है। उसे हिसाब से मेरी पत्नी और मेरे दो बच्चों का खर्च ₹400000 होने वाला था और मैं इसी को बचाने की कोशिश में था। मैं इस खर्च को जीरो करना चाहता था परंतु किसी और को यह खर्च दिखे नहीं रहा था इसलिए मैंने प्राकृतिक खेती से खेती पर काम शुरू किया। क्योंकि मैं सोचता हूं कि किसी भ
 किसी की भी नौकरियां गुलामी करके चाहे वह सरकारी क्यों नहीं हो और प्रतिवर्ष चार लाख रुपए कम करें किसी भी फार्मा कंपनियां हॉस्पिटल को दिए जाएं उससे अच्छा है कि हम सिर्फ ₹100000 ही काम लें और घर पर ही स्वस्थ रहें तो वह फायदे का सदा है।  क्योंकि मैं बचपन से ही किताबों में पढ़ा था कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है यदि धन गया तो कुछ नहीं गया परंतु स्वास्थ्य गया तो सब कुछ गया इसलिए मुझे कई बार लगता था की शायद मैने गलत किताब  पढ़ ली है मेरे सिलेबस में या फिर गलत तरीके से पढ़ ली है। क्योंकि जो बातें किताबों में लिखी होती थीं, वो प्रैक्टिकल से मैच नहीं कर रही थीं और मैं उन पर काम नहीं कर रहा था। मुझे ज़्यादा विरोध का सामना करना पड़ रहा था। घर से भी बाहर से भी। मगर मैं खुशी-खुशी अपने काम में लग रहा हूं। 


30 अप्रैल 2026 को शाम को बाबू ने कहा कि कितने हुए लहसुन एवरेज निकले क्या 5 किलो भी नहीं हुए मैंने बोला कि इस बात की गारंटी है कि जितने भी हुए हैं बिना जहर के हुए हैं हमारे कार्बनिक और प्राकृतिक हैं मार्केट सिक्योरिटी बढ़िया है बोले कि गेहूं 10 मन हो जाती नुकसान कर दिया मैंने बोला 10 मां गेहूं हो जाती और वह चार ₹500000 की हो जाती और फिर हम उसको हॉस्पिटल में दे आते उससे तो अच्छा है कि हम घर पर ही ऑर्गेनिक प्रोडक्ट बनाएं और खाएं और स्वस्थ रहें फिर बोले कि यह खाओगे तो बिल्कुल कभी भी बीमार नहीं होंगे मैंने कहा कि कम बीमार होंगे फिर बोले यह भैंस तो वही जहर वाला खा रही है फिर मैंने कहा कि टाइम लगेगा ऐसे भी ऑर्गेनिक खाएंगे और कार्बनिक की प्रोडक्ट पैदा होंगे सब कुछ नेचुरल होगा प्राकृतिक होता जहर मुक्त होगा लेकिन टाइम लगेगा

28 अप्रैल को जब मूंग की बिजाई करके घर आया तो बाबू ने कहा कि वह जुटा तो नहीं करवाया होगा मैंने कहा वह तो भी जाएगी करवा दिया मांग को दिया है परंतु गुस्सा हो गई थी उसमें भी पानी लगाना था मैंने बोला कि पहले ही बहुत ज्यादा लेट हो गए हैं बोलना जरूरी था मौसम ठंडा रहेगा अच्छे से रुक जाएगा उसकी कोई दिक्कत नहीं होगी और हम ऑर्गेनिक हुआ आएंगे और खाएंगे

25 फरवरी 2026 को जब मैं और काला झटका मशीन लगाने की tyari kr रहे थे तो घर पर काफि हंगामा हुआ
जैसे उल्टे काम करने इसको तो, कोए मर जाएगा करंट लग जाएगा, दिन में बंद करनी होगी, सारी दुनिया खेती करती है इसको पता नहीं क्या लगी है
जब रोज को krnt लगेगा वो वापिस डोरेगा और पुरी गेहूं को बआरबद् कर देगा, pahle bhi एसा हुआ था, नीलगय को दफना दिया था तो उन्होंने पुरी फसल barbad kr diya था जबकि ये असली कारण नहीं था वो दोनों घटनाएं अलग अलग समय कि थी सिर्फ मेरी बात को गलत sabit krne के लिए दोनों को एक साथ बोल दिया घोल दिया गया
फिर मैने काला मिस्त्री को बताया कि मैने नुवासा से बात की थी तो उसने पूछा कि उस गेहूं में खाद किसने डाल दी तो मैने बताया जीतू ने तो बोला कि क्यों वो savsth नही खाने दे रहा जनवरों को भी हमने भी, क्या खुद जहर खाना जनवरों को सबक sikhaana ह
और क्या वो नहीं जानता की उसकी पत्नी की बीमारी पर घर में sbse jyada pese kharch hue हैं, मुझे भी याद आया कि han ये बात तो मुझे भी maalum नही थी की डॉक्टर लोग के बहकाने से तो 30000 प्रति माह सिर्फ़ खाने पर खर्च कर skte हैं बट mere bolne samajhane se samjh नही आता की सेहतमंद रहने के लिए देशी Jaharmukt और sada खाना उत्तम है
चाहे thioda कम ही हो जाए 40000 की जगह 30 का ही हो तो डॉक्टर को एक लाख देने से तो शायद ये बेहतर है





22 frvry 2026 को जब मैं अनिल sidharth विक्रम तार लगा रहे थे तो काका रमेश ने बोला की अब तार की क्या जरुरत है तो मैने कहा की कम खाद डाला है इसलिए suraksha जरूरी है
Bole bina खाद की तो नहीं रही मैने कहा कम खाद की तो ह
फिर नायब ने कहा कि 4-4 कट्टे खाद की डाल के बोलते हैं कि बिना खाद की ह



8 जनवरी 2026 मधु का रात को कॉल आया था कि मेरे पेट में दर्द है और कारण था कि उसने हरी सब्जी और रोटियां में भी हरी में थी डालकर ज्यादा दिन लगातार खाली थथी। फिर मैं 9 जनवरी शुक्रवार को हिसार चला गया , नवासा भी मुझे वहां पर मिला और फिर हमारा अगले दिन अग्रोहा में फरीदपुर जाने का प्लान था जहां से हम राजमा आलू और घिया तरबूज आदि के बीज लेकर आने वाले थे परंतु कुछ अन्य आवश्यक कार्य के चलते हम लेट हो गए और नहीं जा पाए। फिर मैं सिर्फ राजमा के बीज लेकर गया शाम को घर पहुंचा तो मधु ने बोला कि मुझे दवा लेकर आनी थी परंतु लेट हो गए 11 जनवरी को फिर हम खटकड़ गांव में गए दवाई लेने के लिए हाथों की एलर्जी की जो कि मैं नहीं चाहता था परंतु फिर भी गया और आते वक्त माधोन बताया कि तुम राजमा की विदाई क्यों कर रहे हो यह तो भाई का घर है आलोक की तरह मैंने कहा तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो परंतु हरा चारा भी तो भाई का घर है जिसने तुम्हारे पेट में दर्द कर दिया खाने का मतलब है कि चाहे कुछ भी खाओ आवश्यकता अनुसार ठीक रहेगा ज्यादा सेवन हमेशा ही नुकसानदायक है।


25 दिसंबर 2025 को छुट्टी थी थोड़ी-थोड़ी धूप निकलने वाली थी तो मैं प्रिशा को लेकर खेत में चला गया परंतु बहुत श्रद्धा हवा चल रही थी मुझे लगा के बच्चे को लेकर नहीं आना चाहिए था फ्रॉम तो अब जब खेत में आ ही गए थे तो फिर कुछ तो करके ही जाना था, थोड़े से जो खरपतवार बाकी थे मैंने और विक्रम ने उनको उखाड़ फका। फिर घर पर सुनने को मिला कि क्यों लेकर गए थे बच्चों को क्यों यह खेती शुरू की थी क्यों यह सब कर रहे हो मान ही नहीं रहे हो। यह बीमार पड़ गई तो फिर क्या होगा पैसे लगेंगे बच्चों को दिक्कत होगी, इसे मात्र एक संयोग कहा जाएगा की परीक्षा उसे वक्त बीमार नहीं हुई परंतु मेरा और हर्षिता दोनों बहुत ज्यादा बीमार पड़ गई थी एक साथ। 


14 December 2025 को जब मैं गेहूं में बिजली वाली स्प्रे की ड्रामी से जीवा अमृत का छिड़काव कर रहा था तो दूर सी काका रमेश जीतू से कुछ पूछ रहा था और मुझे ढोली की आवाज में वह सुनाई नहीं दिया परंतु जब का काका रमेश मेरे पास से गुजर रहा था तब मुझे यह सुनाई दिया कि उन्होंने बोला
 मुझे लगता है कि वह कभी ढोली को चल रहा है कभी बंद कर रहा है इस हिसाब से कहीं एक किले के दानों से और न रह जाओ तुम मतलब उनके मुताबिक उनको लगता था कि हमारी एक एकड़ में कुछ भी पैदावार नहीं होगी ऑर्गेनिक तरीके से करने से 

जब मैं 13 दिसंबर 2025 को काला मिस्त्री को बोला कि मैं घर आ रहा हूं और मेरे बाबू के पास मेरी मां कल खाना ले जाएगी, तो तुम अपना स्प्रे वाला यंत्र क्या रखना और साथ में बिजली की हमें व्यवस्था करनी होगी परंतु उसने बोला कि चलो खेत में चलते हैं और मैं तो तुम्हारी हेल्प कर दूंगा तुम ड्रामी से ही छिड़काव कर लो और जब मैं वह बात नुवासा को बताई तो उसने बोला कि मैं पहले ही बोला था यही सर्वोत्तम उपाय है परंतु मैंने कहा कि जैसा हम चाहते हैं वैसा परिणाम नहीं आ रहा है और मेहनत भी ज्यादा लग रही है और समय भी.


3 दिसंबर 2025 हिसार जिंदल हॉस्पिटल में बाबू था तो मैं पुना भी रोटी खा रहे थे, रोटी सब्ज़ी बहुत ज्यादा अच्छी थी, बढ़िया सलाद था मेरा मनपसंद पर मुझे गाजर अच्छी नहीं लगी तो मैने बोला दिन में भी मैने एक गाजर खाई थी टेस्टी नहीं थी, अपने वाली ऑर्गेनिक फॉर्मिंग की गाजर ही बेस्ट होगी तो बाबू ने कहा कि बढ़िया तो वो तब होंगी जब होंगी, वो होगी ही नहीं और यही मेरे लिए इंस्पीरेशन थी, यहीं से प्रेरणा मिली बचपन में भी हमने वहीं काम अच्छे से किए जो बोलते थे होंगे नहीं या मुश्किल है और यही बात प्रिशा मे है।



10 नवंबर 2025 सुबह खेत जाकर प्राकृतिक खेती में कई तरह के बीजों की बिजाई की मल्चिंग की पानी दिया 
दिन में 2 बजे तक काम किया मज़ा आया बिक्रम बबिता मधु चरणू भी साथ लगे थे, विक्रम ड्राम ले आया खेत में जीवामृत बनाने के लिए, सभी दोपहर बाद घर लौटे, मैं 3 बजे वाली चाय के साथ रोटी खाने का प्लान किया रोटी कम थी भूख ज़्यादा मधु ने ताजा रोटी बना दी मुझे भी यकीं नहीं हुआ मैं 8 रोटी खा गया कई सालों या दशक बाद शायद मैने इतना खाना खाया कारण था मेरा मनपसंद काम, मेरा पैशन जिसे मैं प्रोफेशन बनाने वाला हूं। रोटी खा के चा पीके खाना खा के मैं छोटा ड्राम 100 ltr बाल्टी आदि पूछने के लिए गाम में दुकान पे गया, वहां नहीं मिली तो बिल्लू दुकानदार दुर्जनपुर से बात की उनके पास से लेने गया, ड्राम बाल्टी ली और वहां एक ओर मज़ेदार ज्ञानवर्धक जानकारी मिली के वो पिछले 2 साल से नेचुरल बागवानी कर रहे हैं, 1.5 साल की पुरानी लस्सी उन्होंने फफूंदनाशक एवं कीटनाशक के रूप में तैयार कर रखी थी, साथ में सुंडी मारने की दवा भी प्राकृतिक रूप में बना की थी, मुझे भी विधि बताई जिसे हम प्रयोग करने वाले हैं।
न्यू ड्राम एवं बाल्टी लेते वक्त में विक्रम को कॉल किया के बाल्टी ड्राम ले लिए हैं मैने वो बोला के घर पे बहुत रखे होंगे अपने पेंट वाले बट मेरा लेने का रीजन ये था के जब अक्टूबर में मैं जीवामृत बना रहा था जिसका प्रयोग असफल रहा तो मैने एक बाल्टी में वो ओर एक में लस्सी रख दी तो मेरी मां ने कहा के करने कराने को कुछ है नहीं 2 बाल्टी रोक के रख दिन इसीलिए मैने न्यू खरीदना बेहतर समझा।
जब मैंने रात को मां से पूछा के लस्सी से भरा ड्राम जिसमें तांबा लोहा भी डालेंगे रसोई में रख दें क्या तो मां ने व्यंग्य रूप में वही ज़वाब दिया जिसकी उम्मीद थी, बोली के नहीं रखना बांस होगी और ऐसे में तो तुम उस ड्राम को फोड हो दोगे मतलब घर वाले ड्राम को प्रयोग में न लेने की नसीहत भी दे डाली साथ में लगे हाथों। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे एक दुश्मन घर में पैदा हो गया है उसकी हर चाल को हर काम को नाकाम करना है चाहे वो काम अबकी भलाई का हो बट करने नहीं देना है। मगर मैं भी बेचारा हालात का मारा क्या करूं कर्म तो करना ही है फल की चिंता करने वाले मेरे से पहले बहुत हैं जिन्होंने रिजल्ट परीक्षा फॉर्म भरने से पहले निकाल रखा है, के कुछ नहीं कर सकता ये कुछ नहीं होगा इससे जबकि मैने तो ऐसा कुछ कर के भी दिखा रखा है जो अपने घर में तो क्या पूरे गाम में भी किसी ने नहीं किया अब तक तो सबके फायदे के लिए नौकरी छोड़ना कई तरह के कई जगह पे काम करने का अनुभव ओर मेरा पसंदीदा खेती में भी "मैने नहीं हमने" रिकॉर्ड बनाएं हैं बस उनका रिकॉर्ड नहीं है और अगर होता भी तो क्या फ़र्क पड़ जाता क्योंकि जिसको मानना ही नहीं है तो हम कर भी क्या सकते हैं। इसीलिए मैने रिकॉर्ड भी रखना शुरू किया लिखित में ताकि समय आने पर सबूतों के साथ प्रस्तुत कर सकूं।



प्राकृतिक जैविक तरीके से लहसुन लगाने की वीडियो 

https://ramukavikissan.blogspot.com/2025/10/starting-of-natural-farming-organic.html

09 nov शाम 4 बजे मैं, मधु, बबीता बीज बोने गए चरणू को भी मैने बुला लिया था, खेत में गए तो मौसी ने कहा इतने में क्या करोगे जगह खराब कर दी रसीना भी वही थी, उसने भी जरूर भड़काया होगा, बाबू ने भी कहा के एक कोने में बो लेते सब्जी इसमें गेहूं बो देते हैं मैने कहा ये जगह भी कम है। फिर बाबू ने कहा के तुमने कहा थे के मैं पराली उठा लूंगा खेत से मौसी ने भी कहा के तुम्हारे बाबू सही कह रहे हैं उनकी सुनो में कहा इतनी उम्र हो गई उनको खेती का ढंग से पता नहीं चला के कैसे करनी है तुम सब 20 साल के हालात के हिसाब से निर्णय लेते हो, मैं 20 साल के अनुभव से आगे की सोच के काम करता हूं तो तुम्हारी कैसे सुनूं। ओर जो पराली उठाने की बात है तो जीतू ने उस सुन मुझे रोक दिया था के पहले पराली जला दो  बाद में उठाते रहना, तो मैने कहा था के मुझे पराली उठानी है उसकी राख नहीं।

बाबू ने कहा के मैं हर बार अच्छी तरह से हर चीज़ बो देता था, पर हमें तो गाड़ी वाले से ही सारी चीज़ खरीदनी पड़ रही हैं कई साल से। 

फिर बात ये थी कि इतनी गेहूं का नुक्सान हो गया मैने बोला के जितनी गेहूं इस सारे में होती उस से ज़्यादा का तो 4 डयोल पर लहसुन हो जाएगा ये घाटे का सौदा नहीं है। फिर बोला गया के इतने दिन हो गए धीरे धीरे बो रहे हो जमीन बहुत गीली थी बट बोले के ये सुख जाएगी बात आई हुई है, बूंडा डाल बना रखा है मैने बोला के sutra किसको दिखाना है हमारा खेत हम बोने वाले पैदा होनी चाहिए बस। 

फिर charnu ने भी वीडियो कॉल करके निवासे को कमियां गिनवाई और घर वालों का पक्ष लिया। मैने उसे धीरे से कहा के मेरे घर पर 14 में से 10 लोग कमी निकालने वाले हैं तुम्हे कमी सुधारने के लिए बुलाया है कमियों का तो मुझे भी पता है इनको भी, मैने पूछा तुमने क्या बढ़िया किया है खेती में या प्राकृतिक खेती के लिए अब तक मेरे से बेहतर जो मेरे में कमी निकल रहे हो, तुमने तो शुरुआत तक नहीं की, मैने कुछ तो किया कुछ करेंगे तो कमी भी होगी, तुमने किया ही नहीं कुछ तो कमी किस्में निकलेगी, तब वो चुप हुआ। फ़िर वो बोला के तुम्हें खेत की तैयारी अच्छे से करनी चाहिए थी, कल क्या किया मने बोला सीएससी का काम किया और बीज लाने के लिए पैसे का इंतज़ाम किया, फिर बाकी दिन मैं बच्चों को भी संभालता हूं, फोन को भी, सीएससी को भी, रेस्ट भी जरूरी है ज़िन्दगी में, फिर जितने भी मेरे खिलाफ़ प्राकृतिक खेती नहीं करने की साजिशें चल रही हैं उनका सामना करना पड़ता है उसमें काफ़ी एनर्जी लग जाती है। रात तक चरणयू को समझ आ गया था के हालात के हिसाब से भी चलना पड़ता है सब कुछ अपने हाथ में नहीं है।

मैने मधु बबीता को घर भेज दिया के आज लेट हो गए कल बिजाई करेंगे फिर नंबर आया विक्रम का उसने कहा के तुम सुबह 5 बजे उठ सकते हो क्योंकि उसको ये पता नहीं के मैं 5 बार तो रात को भी उठता हु तो नींद पूरी कैसे होगी जोकि सबसे जरूरी हिस्सा है हर किसी की जिंदगी का नहीं तो हम बीमार पड़ सकते हैं जोकि मुझे मंज़ूर नहीं। फिर उसने कहा तुम अच्छे से खुदाई करके पानी डाल सकते थे नहीं डाला ओर भी कई कमियां गिनवाई जोकि हर कोई आसानी से ये काम कर सकता है कर चुके हैं तो मैने कहा के बिल्कुल सही कहा तुमने मैं कुछ नहीं करता कुछ नहीं कर सकता बट तुमने क्या किया मेरे लिए या मेरे साथ काम में प्राकृतिक खेती का तो मुझे कैसे बोल सकते हो के नहीं किया मैने कुछ तो किया तुमने तो कुछ भी नहीं किया। करना है तो काम करो साथ दो रोको तो मत, तब मैंने एक उदाहरण दिया जोकि उसी वक्त ध्यान में आया था, के पुराने घर को कभी तो टूटना है उससे पहले मैने एक नए तरीके से नए अनोखे डिजाइन का घर शुरू कर दिया जो सबके लिए सुरक्षित आरामदेह सुविधाजनक हो, उसकी दीवारें थोड़ी टेढ़ी हो गई क्योंकि मैं एक अच्छा मिस्त्री नहीं था शायद पहली बार में तो कोई भी नहीं होता मगर मेरे घर में से 14 में से 10 मेंबर ने बोला के तेरे बस की बात नहीं है ऐसा घर तो बन ही नहीं सकता इस दीवार को तोड़ तो नुकसान करोगे तुम, मतलब घर की दीवार सीधी करवाने की बजाए, उसकी कमी दूर करवाने की बजाए, सहारा लगाने की बजाए सब दीवार गिराने में जुटे हैं क्या फ़र्क पड़ता है?

साथ में sonit प्रिशा शरारत कर रहे थे, उनको भी रोकना था, बाबू की भी सुननी थी, मौसी की भी, काका बलवान भी आया था, फूफा होशियारा, kheri मसानिया से उस्ताद जी भी, मैं कसी लेने गया था तब तक मेरे पीछे से सबको मेरी कमियों से अवगत करवा दिया गया था के अबकी बार कितनी घाटा मैं करने वाला हूं।

09 Nov सुबह करोड़ा से देसी बीज लेने गया 60 km जाना 60 आना 120 km का सफ़र, बीज लेके आया देसी गाजर, मूली, शलगम, चुकंदर, पालक, धनिया, जीरा, मेथी ताकि सब्जी एवं रसोई का सारा सामान घर पर उपलब्ध हो वो भी जहर मुक्त घर पर kheri मसानिया se driver evm फूफा होशियार सिंह जंडली आ गए तो उनके पास टाइम लग गया फिर जैसे ही खेत गया वही हुआ जो हर रोज होता है प्राकृतिक खेती करने से रोकने के रोज़ नए तरीके नए बहाने 

सुबह मधु ने बोला था के तुम्हारे बस की नहीं है खेती, जब मैं घर होता हूं बोलते हैं यही पड़े रहते हो कुछ नहीं करते, फिर कल परीक्षा व छोटी को खेत में ले गया दोपहर 12 बजे लौटा तो बोले इनको लिए बाहर घूम रहे हो ठंड में मारोगे फिक्र नहीं है तुम्हे, बच्चों को नहीं सम्भाल सकते, जबकि प्रिशा ने सुबह देश पिया पोटी की फिर एक सेब खाया खेत में जाके फिर एक लाल अनार खाया (वीडियो उपल्ब्ध है), एक मूली खाई, घर आके मेरे साथ एक रोटी खाई, लस्सी पी, उसके लिए शायद मेरे हिसाब से सर्वोत्तम खुराक थी मगर समझने को तैयार नहीं

सुबह ही मौसी ने जीतू को कहा के बिक्रम खेत में गेहूं के लिए कोने खोदेगा साथ में डयोल स्मारेगा तुम भी चले जाना, जीतू बोला क्या ज़रूरत है फालतू में अभी कुछ भी करने की कोने बाद में खोद देंगे और डयोल samarne की जरूरत ही नहीं है सारी सही तो हैं, मैने कहा शुक्र है मैं बच गया तुम्हारे बिक्रम के कहने से मैं खेत म जाता ओर जीतू इस काम से मना कर देता जैसा कि मेरे साथ होता आया है, 5 बार कोई काम गया हर बार विरोध घर से भेजा ये काम करो खेत में बोला के नहीं करना है, फिर नहीं करने में फ़ायदा लगा एनर्जी ओर टाइम दोनों बच जाते हैं और ज़्यादा सुन ना भी नहीं पड़ता इसी में पड़ता लगता है 


08 संडे को प्रिशा को छोटे खेत में कछुआ दिखाने के गया जो कुएं में था फिर वापिस आया, इनके सर्टिफिकेट के बारे खुशीराम के पास गया, HDFC BANK वाले नानू के विक्रम ने भी चार महीने पहले जॉब छोड़ दी थी, घर पर प्रिशा को सेब खिलाया, दूसरे खेत में ले गया परीक्षा ने अनार, मूली खा लिए बोले बीमार होगी ये बाहर लिए घूम रहे हो, न ले जाएं बोलते हैं पड़े रहते हो घर, मौसी ने तो कहा के घर ही मत आया करो परीक्षा ज्यादा रोती है 

5 Nov बाबू ने कहा कि जो बोना है बो दो दो महीने लगा दिए तब तक तो लहसुन फसल तैयार भी हो जाती

5 nov मौसी ओर बाबू शीशम की लकड़ी अलग कर रहे थे बहुत ज्यादा पते हो गए थे तो मैने मौसी को कहा के एक पली में गठरी बांध के ये पत्ते मैं खेत में ले जाऊंगा खाद बनेगा और खरपतवार भी पैदा नहीं होगे तो मौसी ने कहा के मैं तो इनको kurdi पर फेंक दूंगी वहां भी खाद बनेगा जो 2 साल लगेंगे जोकि मैं वई काम 2 महीने में करने वाला था।

4 Nov जब मैंने दो nov को लस्सी एवं गोबर का छिड़काव किया तो बोले कि बुरा हाल कर रखा है गोबर छिड़का है हर जगह 

मैने कहा कि एकदम से कुछ नहीं होगा थोड़ा टाइम तो लगेगा सब कुछ आराम से हो जाएगा 

01 Nov मौसी ने कहा के इतनी जगह जितनी तुमने घेर रखी है इसमें तो 2 साल की सब्ज़ी आ जाए पूरे परिवार के लिए, ऐसा दो बार ज़ोर देकर कहा तो मैने कुछ नहीं बोला मुझे लगा के ये तो मैने बड़ा घाटे का सौदा के दिया अंजाने में, फिर मैने बिक्रम ने पराली कूट ते हुए अनुमान लगाया के एक डबरा से भी आधा यानि एक कनाल में प्राकृतिक खेती का प्लान है हमारे खेत में अधिकतम 55 मण गेहूं हुई है यदि 60 मण प्रति एकड़ भी माने तो आधा किला के 30 मण ओर एक डबरा में 15, तो एक कनाल में 7.50 मण यानी के लगभग 3 क्विंटल गेहूं हुई जो 2500 के हिसाब से 7500 रुपए की हुई, तब मुझे एहसान हुआ के ये तो 2 महीने की सब्जी भी मुश्किल से आएगी।

हर जगह पर अड़ंगा ही फैला रखा है 26 oct

पराली को कूट दिया तो बोला कि इसको क्यों फैला रहे हो 30 oct

जितनी जगह तुमने लहसुन और सब्जी के लिए घेर रखी है इतने में तो 2 साल की सब्ज़ी आ जाती पूरे परिवार के लिए 1 nov 

जब हमने विश्लेषण किया पता चला कि हमारे खेत में 55 मन से ज्यादा गेहूं की पैदावार कभी नहीं हुई है यदि 60 मन के हसाब से भी जोड़े तो एक कनाल में 7500 की गेहूं होती है जीतने का एक महीने में फल सब्जी पूरा परिवार खा जाता है 14 मेंबर का



जब लस्सी और जीवामृत का स्प्रे sham ko ja raha tha to bola ki hamesha let Hi Kam karte ho 2 oct






जहर मुक्त खेती प्राकृतिक खेती के नुक्सान Problem in Natural Farming 

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